[6 अधिकार] मूल अधिकार कितने हैं PDF (Fundamental Rights In Hindi PDF)

मूल अधिकार – भारतीय होने के नाते आपको मूल अधिकार के बारे में जरूर जानना चाहिए, ये हर भारतीय का अधिकार है। और अगर आप परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तब  मूल अधिकार से संबंधित प्रश्न UPSC में अधिकांश रूप से पूछे जाते हैं। मौलिक अधिकार को हम मौलिक अधिकार या Fundamental Rights कहते हैं।

Fundamental Rights In Hindi PDF : मैं आपको मूल अधिकार कितने हैं, मूल अधिकार कहाँ से लिया गया है आदि से सम्बंधित जानकारी दूंगा। अगर आप इसे पढ़ लेंगे तो इससे सम्बंधित जितने प्रश्न हैं, आप परीक्षा में कभी गलत नहीं करेंगे। नीचे मैंने आपको इसका पीडीऍफ़ (PDF) भी दिया है, जिसे डाउनलोड कर के प्रिंट (Print) करा सकते हैं।

मूल अधिकार क्या है
मूल अधिकार कहाँ से लिया गया है
नागरिकों के मूल अधिकारियों का रक्षक कौन है?
मूल अधिकार कितने हैं
अनुच्छेद-12-35
मूल अधिकार PDF
मूल अधिकार MCQ




Table of Contents

मूल अधिकार क्या है

मूल अधिकार किसी भी व्यक्ति पर लागु होता है, ये किसी संस्था या कम्पनी पर लागु नहीं होता है। किसी व्यक्ति के जीवन जीने के लिए मूल अधिकार बहुत ही जरुरी है। कोई भी सरकार किसी व्यक्ति का मूल अधिकार नहीं छीन सकती है, जब तक उसने कोई गुनाह साबित नहीं हो जाता है।

जैसे – जेल में, आपका स्वतंत्रता का अधिकार छीन लिया जाता है।

यह प्रकृतिक है इसीलिए नैसर्गिक कहते हैं। इसे हम क़ानूनी अधिकार इसलिए नहीं कहते हैं, क्योकि ये हमसे कोई पडोसी या अन्य व्यक्ति हमसे नहीं छीन सकता लेकिन सरकार छीन सकती है, बशर्ते आप गुनाह न किये हों ।

 मूल अधिकार कहाँ से लिया गया है?

भारत के मूल अधिकार को अमेरिका से लिया गया है। अमेरिका में लिखित रूप से मूल अधिकार है, इसे हम अपने संविधान में भाग-3 में जगह दिए और ये अनुच्छेद 12-35 तक है। कभी-कभी परीक्षा ये पूछ लिया जाता है की, किस भाग को मैग्नाकार्टा कहते हैं, तो भाग 3 को मैग्नाकार्टा कहा जाता है।

मूल अधिकार आपके लिए जरुरी भी है, लेकिन कभी कभी ये घातक भी हो जाता है। इसीलिए कुछ समय के लिए मौलिक अधिकार को निलम्ब भी किया जा सकता है, निलम्ब करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास होता है। ऐसा तभी होता है जब कोई विदेशी आक्रमण हमारे देश पर होता है तभी राष्ट्रपति द्वारा मूल अधिकार छीन लिए जायेंगे।

अगर कोई मूल अधिकार किसी की स्वतंत्रता को छिनता है तो उसे पूरी तरह से प्रतिबंध कर दिया जायेगा। ऐसा करने का अधिकार केवल संसद के पास है।

नागरिकों के मूल अधिकारियों का रक्षक कौन है?

नागरिकों के मूल अधिकारियों का दुरूपयोग संसद कर सकती है, इसलिए, नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट Supreme Court और हाईकोर्ट High Court ) को बनाया गया।

यदि सरकार हमारे ऊपर से मूल अधिकार को हटा देती है, तब हम मूल अधिकार के लिए न्यायपालिका में जा सकते हैं। (सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में से किसी में भी जा सकते हैं)।

भारतीय मौलिक अधिकार वाद-विवाद (प्रवर्तनीय) योग्य है?, इसका जवाब है इसका जवाब हाँ है, हमारा हम न्याय पालिका में जा के वाद-विवाद कर सकते हैं।

मूल अधिकार कितने हैं

भारतीय संविधान में 6 मूल अधिकारों को रखा गया है जो निम्न हैं –

  1. समानता का अधिकार (Right to Equality) (अनुच्छेद 12-18)
  2. स्‍वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) (अनुच्छेद 19-22)
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation) (अनुच्छेद 23-24)
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion (अनुच्छेद 25-28)
  5. संस्कृति और शिक्षा का अधिकार (Right to Culture and Education) (अनुच्छेद 29-30)
  6. संवैधानिक उपचार का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) (अनुच्छेद 30-35)

समानता का अधिकार (Right to Equality)

समानता का अधिकार (Right to Equality) (अनुच्छेद 12-18)

अनुच्छेद 12 

परिभाषा –

  • राज्य कोई भी ऐसा कानून नहीं बनाएगा जो किसी के मूल अधिकार को छीन रहा होगा
  • केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय सरकार

अनुच्छेद 13

परिभाषा –

  • अल्पीकरण (Derogation)
  • असंगत (Inconsistent)

1. अल्पीकरण (Derogation) : अगर हमारे अधिकार से किसी को तकलीफ होती है,तो यह मूल अधिकार नहीं है।

जैसे – हमे अभियक्ति की आजादी है यानि बोलने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम किसी को गाली दे सकते हैं।

अनुच्छेद 13 कहता है, हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागु हुआ था, लेकिन उससे पहले भी बहुत से कानून थे, जो आगे भी बने रहेंगे। जैसे IPC की धाराएं। लेकिन इसे तब तक लागु किया जायेगा, जब तक वर्तमान में बने हुए संविधान में रुकावट न डाल रहा हो।

अनुच्छेद 14

परिभाषा –

  • कानून के समक्ष समानता (Equality Before The Law)
  • कानून का समान संरक्षण (Equal Protection Of The Law)

अनुच्छेद 15

परिभाषा – अनुच्छेद 15 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति पर पांच आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है। ये पांच आधार ये हैं –

  1. धर्म
  2. जाति
  3. वंश
  4. लिंग
  5. जन्मस्थान




अनुच्छेद 16

परिभाषा – लोक नियोजन की समानता

  • अनुच्छेद 16 के अंतर्गत सभी लोगों को सरकारी नौकरी में सामानता मिलेगा
  • आरक्षण हमेशा जाति के नाम पर होगा, धर्म के आधार पर नहीं होगा
  •  लिंग के आधार पर भी आरक्षण हो सकता है, (लड़का और लड़की)
  • आरक्षण स्थान के आधार पर भी मिल सकता है

जैसे – अगर उत्तर प्रदेश में नौकरी हो तब – उत्तर प्रदेश के मूल निवासी को कम नंबर पर भी नौकरी मिल सकती है जबकि आप दूसरे राज्य के हैं तो आपको ज्यादा नंबर लाने पर नौकरी मिलेगा।

अनुच्छेद 17

परिभाषा – अस्पृश्यता (Untouchability)

किसी को धर्म और जाति के आधार पर छुआ छूत नहीं कर सकते।

अनुच्छेद 18

परिभाषा – उपाधियों का अंत (Abolitation Of Title)

अनुच्छेद 18 के अन्दर आप किसी भी प्रकार की उपाधि नहीं रख सकते है। जैसे – महाराज, सर, नाइट हुड आदि , लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में आप उपाधि रख सकते हैं। जैसे डाक्टर, इंजीनियर, फार्मासिस्ट आदि

स्वतंत्रता-का-अधिकार-right-to-freedom

स्‍वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) (अनुच्छेद 19-22)

अनुच्छेद 19

परिभाषा – इसे हम संविधान की रीढ़ कहते हैं।

इसके अंतर्गत नागरिको को 6 स्वतंत्रताएं दी गयी हैं। जो निम्न हैं –

  1. विचार व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  2. अस्त्र-शस्त्र रहित शांतिपूर्ण सम्मेलन की स्वतंत्रता
  3. समुदाय व संघ बनाने की स्वतंत्रता
  4. भ्रमण की स्वतंत्रता
  5. निवास की स्वतंत्रता
  6. व्यवसाय की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 20

परिभाषा – अपराध की दोषसिद्धि के विषय में संरक्षण

अनुच्छेद 19 में कहा गया है की किसी भी व्यक्ति को उस समय तक अपराधी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि उसने अपराध के समय में लागू किसी विधि का उल्लंघन न किया हो।

अनुच्छेद 21

परिभाषा – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार

किसी भी नागरिक को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किये बिना उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।




अनुच्छेद 22

परिभाषा – इसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना कारण बत गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।

गिरफ्तार व्यक्ति अपनी इच्छा के वकील के माध्यम से अपना बचाव कर सकता है।

  • पुलिस के लिए आवश्यक है कि अभियुक्त को 24 घंटे के अंदर, न्यायाधीश (Judge) के सामने प्रस्तुत करे

जीवन व स्वन्त्रता के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय का मत –

  • इस अधिकार में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि शोषणमुक्त और गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार अंतर्निहित है।
  • न्यायालय ने यह माना कि जीवन के अधिकार का अर्थ है कि व्यक्ति को झोपड़ी व रोजी-रोटी का भी अधिकार हो क्योंकि उसके बिना कोई व्यक्ति जिंदा नहीं रह सकता।
निवारक नजरबन्दी –
  • इसका वर्णन संविधान के अनुच्छेद 22 (खण्ड-4) में किया गया है। यह सरकार के लिए असामाजिक तत्वों तथा राष्ट्र-द्रोही तत्वों से निपटने का हथियार है। निवारक नजरबन्दी युद्ध-वशांति दोनों ही समय के लिए व्यवस्था है।
  • इसके सहत किसी व्यक्ति का इस आशंका पर गिरफ्तार किया जा सकता है कि वह गैर कानूनी कार्य करने वाली है। इस प्रकार यह बिना किसी व्यायिक प्रक्रिया के नजरबन्दी है।
  • निवारक नजरबन्दी अधिकतम 3 महीने के लिए हो सकती है। तीन माह बाद ऐसे मामले समीक्षा हेतु सलाहकार बोर्ड के समझ लाये जाते हैं।

Right Against Exploitation

शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation) (अनुच्छेद 23-24)

अनुच्छेद 23

परिभाषा – अनुच्छेद 23 में 3 महत्वपूर्ण बाते कही गयी हैं –

  • दुर्व्यवहार, तस्करी (Trafficking) (इसमें आप किसी मनुष्य को बेच और खरीद नहीं कर सकते हैं, ये ये शोषण के विरूद्ध के अपराध की श्रेणी में आता है)
  • बेगारी (Bonded) (इसमें किसी व्यक्ति को बिना पैसा दिए काम नहीं करा सकते हैं)
  • बलात श्रम (forced labor) किसी से जबरदस्ती या मारपीट कर के काम नहीं करा सकते हैं।

अनुच्छेद 24

परिभाषा – बाल नियोजन पर प्रतिबन्ध

  • बाल श्रम (Child Labour) (इसके अंतर्गत 14 साल या उससे कम उम्र के लड़के और लड़कियों को कारखानों या अन्य किसी भी पैसे कमाने के क्षेत्र में नहीं रख सकते हैं)
  • किसी बच्चे को खतरनाक या जोखिम भरे क्षेत्र में नहीं लगा सकते हैं (खदान और पटाखा बनाने वाले कारखाने)




धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) (अनुच्छेद 25-28)

अनुच्छेद 25

परिभाषा – अन्तः करण (conscience)

किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता और प्रचार करने की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 26

परिभाषा – धार्मिक मामलों के प्रबंध की स्वतन्त्रता

अनुच्छेद 27

परिभाषा – कर मुक्त धार्मिक कार्य

धार्मिक कार्यों हेतु व्यय की जाने वाली राशि कर मुक्त

अनुच्छेद 28

परिभाषा – शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने या न करने का अधिकार तथा राजकीय शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा का निषेध




संस्कृति और शिक्षा का अधिकार (Right to Culture and Education) (अनुच्छेद 29-30)

अनुच्छेद 29

परिभाषा – अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा

संस्कृति, भाषा, लिपि, धर्म, जाति के आधार पर संस्थान से वंचित नहीं कर सकते हैं।

अनुच्छेद 30

परिभाषा – अल्पसंख्यक अपनी संस्थान खोल सकते हैं। सरकार उन्हें भी धन उपलब्ध कराएगी।

जैसे – मदरसा, संस्कृत विद्यालय




संवैधानिक उपचार का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) (अनुच्छेद 32-35)

 

अनुच्छेद 32

यह अधिकार वह साधन है जिसके द्वारा मौलिक अधिकारों को व्यवहार में लाया जा सकता है।

अनुच्छेद 33

इस अधिकार के तहत कोई भी नागरिक मौलिक अधिकारों के उल्लंघन किये जाने पर सीधे सर्वोच्च या उच्च न्यायालय जा सकता है।

अनुच्छेद 34

इस मौलिक अधिकार को डा० अम्बेडकर ने से विधान का हृदय व आत्मा की संज्ञा दी।

अनुच्छेद 35

सर्वोच्च या उच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की बहाली आदेश जारी करते हैं जिन्हें प्रादेश या रिट कहा जाता है जो निम्न है

  1. बन्दी प्रत्यक्षीकरण
  2. परमादेश
  3. निषेध आदेश
  4. अधिकार पृच्छा
  5. उत्प्रेषण

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग:

मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें मिलने पर जोच करता है, मानवाधिकार के क्षेत्र में शोध करता है या शोध को प्रोत्साहित कर सकता है में है. यह जेलों में बर्दियों की स्थिति का अध्ययन कर सकता है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय का एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश तथा मानवाधिकारों के सम्बन्ध में ज्ञान व व्यावहारिक अनुभव रखने वाले दो अन्य सदस्य होते हैं।

मूल अधिकार (Fundamental Rights In Hindi PDF)
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Upload Date 08/05/2022
Uploader Name Raghav

 

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मूल अधिकार से पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1 – किस मूल अधिकार को भारतीय संविधान की आत्मा कहा गया है?
उत्तर – अगर कोई आपके पूछ की अनुच्छेद को संविधान की आत्मा कहते हैं, तो अनुच्छेद 32 लेकिन कोई आपके पूछे की किस भाग को संविधान की आत्मा कहते हैं तो इसका उत्तर संविधान की प्रस्तावना होगा।

प्रश्न 2 -संविधान की कुंजी किसे कहते हैं?
उत्तर – संविधान की प्रस्तावना को कहते हैं।

प्रश्न 3 – सबसे महत्वपूर्ण मूल अधिकार है?
उत्तर – संविधान का सबसे महत्वपूर्ण मूल अधिकार अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22 है। इसमें जीवन जीने के अधिकार शामिल है, ये आपातकाल की स्थिति में भी खत्म नहीं होगा।

प्रश्न 4 – मूल अधिकार का महत्व?
उत्तर – मूल अधिकार किसी भी व्यक्ति पर लागु होता है, किसी भी व्यक्ति के जीवन जीने के लिए मूल अधिकार बहुत ही जरुरी है। कोई भी सरकार किसी व्यक्ति का मूल अधिकार नहीं छीन सकती है, जब तक उसने कोई गुनाह साबित नहीं हो जाता है।

निष्कर्ष –

मैंने आपको इस पुरे लेख में मूल अधिकारों के बारे में जिक्र किया है, ये अधिकार भारत में रहने वाले सभी लोगों पर लगता है। आपने ये भी जाना की भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार को 12 से 35 तक 6 भागों में रखा गया है। मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण, 6 भाग में किया गया है जिनके नाम मैंने ऊपर बताएं हैं।

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