रीठा खाने के फायदे और नुकशान | Reetha Ke Fayde

रीठा जो की सभी गुणों से सम्पन्न फल है, जिसका उपयोग बहुत सी बीमारियों और उनके उपचार में किया जाता है, यह भारत के कई राज्यों में उगाया जाता है। और आयुर्वेद में रीठा का बहुत ही ज्यादा इस्तेमाल होता है। मैं आपको आज रीठा के बड़े फायदों के बारे में बताऊंगा, और ये भी बताऊंगा की आप इसका इस्तेमाल किन रोगों में कर सकते हैं।

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रीठा

रीठा की दो जातियां पाई जाती हैं –

  1. Sapindus mukurossi
  2. Sapindus, trifoliatus

[1] Sapindus mukurossi :

हिमालय प्रदेश में 4000 फीट की ऊंचाई तक इसके जंगली वृक्ष पाये जाते हैं। परन्तु उत्तर भारत, असम आदि में मनुष्यों द्वारा लगाये हुए इसके वृक्ष बाग- बगीचों में या गांवों के आसपास पाये जाते हैं।

[2]Sapindus, trifoliatus :

इसके वृक्ष विशेषतः दक्षिण भारत में मिलते हैं, इसके फल 3-3 एक साथ जुड़े होते हैं। फलों की आकृति वृक्काकार होती है और पृथक होने पर जुड़े हुए स्थान पर हृदयाकार चिह्न पाया जाता है। ये पकने पर किंचित लालिमा लिए भूरे रंग के होते हैं।

 

बाह्य स्वरूप –

इसका वृक्ष 50 फुट तक ऊंचा, प्राय: 5 फीट परिधि का होता है। पत्र 5-12 इंच लम्बा होता है। पुष्प श्वेतवर्ण 1/5 इंच लम्बे, रोमश अत्यन्त सघन मंजरियों में आते हैं। फल-मांसल 2-3 खण्डीय, 1/2-3/4 इंच लम्बे, तरुणावस्था में रोमयुक्त, सूखने पर कृष्णाभ भूरे रंग के, सिकुड़नयुक्त होते हैं। बीज मटर सदृश, काली चिकनी मज्जा में संसक्त रहते हैं। पुष्प नवम्बर दिसम्बर में आते हैं। इसके फल फरवरी से अप्रैल तक तैयार हो जाते हैं।

 

औषधीय प्रयोग

1. आधाशीशी : अरीठे के फल को 1-2 काली मिर्च के साथ घिसकर नाक में 4-5 बूंद टपकाने से आधाशीशी का रोग तुरन्त सरल अभिष्यंद में रीठे के फल को मिट जाता है

2. नेत्र रोग : सरल अभिष्यंद में रीठे के फल को जल में उबालकर इस जल को पलकों के नीचे रखने से लाभ होता है।

3. दंत रोग : रीठे के बीजों को तवे पर जलाकर पीस लें और इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई फिटकरी मिलाकर दांतों पर मलने से दांतों के सब प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।

4. अनन्त वायु : प्रसव के पश्चात् वायु का प्रकोप होने से स्त्रियों का मस्तिष्क शून्य हो जाता है। आंखों के आगे अंधकार छा जाता है। दांतों की बत्तीसी भिड़ जाती है। इस समय अरीठे को पानी में घिसकर फेन पैदाकर आंखों में अंजन लगाने से तत्काल वायु का असर दूर होकर स्त्री स्वस्थ हो जाती है।

5. अपस्मार : बीज गुठली और छिलके समेत रीठे को पीसकर मिर्गी वाले को नित्य सुंघाने से मिर्गी रोग ठीक हो जाता है। परमपूज्य स्वामी रामदेवजी का स्वानुभूत प्रयोग रीठा चूर्ण 1 ग्राम, 2-3 ग्राम त्रिकुट चूर्ण को 50 ग्राम पानी में डालकर रखें। प्रातः काल जल को निखार कर अलग शीशी में भर लें। इस जल की 4-5 बूंद प्रातः काल खाली पेट नियमित रूप से नाक में डालने से अन्दर जमा हुआ कफ बाहर निकल जाता है। नासा रन्ध्र फूल जाते हैं व सिर दर्द में भी तुरन्त लाभ मिलता है।

 [I] कपूर कचरी 100 ग्राम, नागर मोथा 100 ग्राम और कपूर तथा अरीठे के फल की गिरी 40-40 ग्राम शिकाकाई 25 तोला, आंवला 200 ग्राम । इन सबका चूर्ण करके इनमें से 50 ग्राम मात्रा में पानी मिलाकर लुग्दी बनाकर बालों में मसलना चाहिए। उसके बाद बालों को गरम पानी से खूब स्वच्छ कर लें। इससे सिर के अंदर की जूं लीकें मर जाती हैं और बाल सिल्की हो जाते हैं।

 [II] रीठा, आंवला, शिकाकाई तीनों के मिश्रण से भी बाल धोने से बाल सिल्की, चमकदार, रूसी रहित और घने हो जाते हैं।

6. दमा : 1. इसके फल को पीसकर उसकी सुंघनी सुंघाने से तुरन्त लाभ होता है। 2. इसके फल को जल के साथ पीसकर उसमें 1-2 नग काली मिर्च भी पीसकर इस जल की 5-6 बूंद नाक में टपकाने से लाभ होता है।

7. खूनी बवासीर : अरीठे के फल में से बीज निकालकर फल के शेष भाग को तवे पर जलाकर कोयला कर लें, फिर इसमें इतना ही पपड़ियां कत्था मिलाकर अच्छी तरह से पीस कर कपड़छन कर लें। इस में से 125 मिलीग्राम औषधि सुबह शाम मक्खन या मलाई के साथ 7 दिन तक सेवन करें।

परहेज- जब तक दवा चले, तब नमक और खटाई नहीं खानी चाहिए।

8. अतिसार: इसकी साढ़े चार ग्राम गिरी को पानी में मथकर जब फेन पैदा हो जाये, तो इस जल को बिसूचिका, कै और अतिसार के रोगी को पिलायें।

9. मूत्रकृच्छ्र : 25 ग्राम रीठे को रात भर 1 लीटर पानी में भिगोये रखें। सुबह उसका निथरा हुआ पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिलाने से लाभ मिलता है।

10. नष्टार्तव: रजोवरोध में इसके फल की छाल या गिरि को महीन पीसकर शहद में मिलाकर बत्ती बनाकर योनि में रखने से रुका हुआ मासिक धर्म आरम्भ हो जाता है।

11. प्रसव : शीघ्र प्रसव के लिए इसके फल के फेन में रूई का फाहा भिगोकर योनि में रखने से बच्चा सुख से उत्पन्न हो जाता है।

12. शूल : इसकी गिरी के 250 मिलीग्राम चूर्ण को शरबत या जल के साथ दने से शूल से मिटता है।

13. वीर्य वृद्धि : रीठे की गिरी को पीसकर उसमें सम भाग गुड़ मात्रा में मिलाकर एक चम्मच की सुबह-शाम एक कप दूध के साथ सेवन करें।

14. विष : इसके फल को पानी में पकाकर, विष अल्पमात्रा में लेने से वमन होकर निकल जाता है।

15. अहिफेन विष :  पानी में रीठे को इतना उबालें कि भाप आने लगे, इस पानी को आधा कप मात्रा में पिलाने से अफीम का विष उतर जाता है।

16. वृश्चिक विष :

[I] इसके फल की मज्जा को तम्बाकू की तरह हुक्के में रखकर पीने से बिच्छू का विष उतरता है।

[II] अरीठे के फल की गिरी को पीसकर उसमें गुड़ समभाग मिलाकर 1-2 ग्राम की गोलियां बनायें, उन्हें पांच-पांच मिनट बाद , पानी के साथ लें। 15 मिनट में ही तीन गोली देने से बिच्छू का विष उतरता है।

[III] फल को पीसकर आंख में अंजन लगाने तथा दंशित स्थान पर लगाने से भी बिच्छू काटने पर लाभ होता है।

17. विषैले कीट : रीठे की गिरी को सिरके से पीसकर काटने के स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

दोष- गरम प्रकृति वालों को इसका अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए।

गुण-धर्म –

यह त्रिदोष नाशक, गर्भपातन और ग्रहों को दूर भगाता है। रीठा वामक, रेचक, कृमिघ्न कफ निःसारक, गर्भाशय संकोचक, इसका नस्य अर्धावभेदक, मूर्च्छा एवं अपतंत्रक नाशक है। विषघ्न, विशेषकर अफीम का विष दूर करने में प्रयुक्त। इसका विशेष प्रयोग कफ, वात रोगों में किया जाता है.

निष्कर्ष

मैंने आपको रीठा के फायदों के बारे में जानकारी दी है। यदि आपको ये लेख पसंद आयी है तो अपने मित्रों को साझा करें और इसकी जानकारी उन तक पहुँचाने में मदद करें।

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