दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो Seven Wonders of the World in Hindi

 दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो (Duniya Ke 7 Ajuba Picture And Names) : आपने अक्सर सुना होगा की हमारी पृथ्वी अन्य ग्रहों से विचित्र है, इसी कारण हमारे ग्रह पर जीवन है, लेकिन हमारे पृथ्वी पर भी बहुत ऐसी जगहें हैं, जो हमारे अतीत में आएं हुए व्यक्तिओं ने बनवाये हैं. इन्ही को हम अजूबे बोलते हैं. क्या आपको पता है की विश्व में कितने अजूबे हैं. हमारी पृथ्वी पर पुरे 7 अजूबे हैं. इन्ही 7 अजूबों के बारे में मैं आपको बताऊंगा. 

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 हमें आपको इन 7 अजूबों को बताने का उद्देश्य यह है क्योकि, हमारे देश भारत भी इसमें शामिल है, और आपको हम बताएंगे, की भारत की कौन सी धरोहर इसमें शामिल हैं.

7 अजूबे कौन कौन से हैं?

  1. माचू पिच्चु
  2. पेट्रा
  3. ताजमहल
  4. चिचेन इत्जा
  5. चीन की दीवार
  6. कोलोज़ीयम
  7. क्राइस्ट रिडीमर

दुनिया के सात अजूबे इन इंग्लिश  (7 अजूबे का नाम In English)

Seven Wonders Of The World

  1. Machu Picchu
  2. Petra
  3. Taj Mahal
  4. Chichen Itza
  5. Wall of china
  6. Colosseum
  7. Christ redeemer

वैसे मैं आपको बता दूँ की पूरा विश्व मिलके इन सात अजूबों को मान्यता दिया है, ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हे 8 से 10 अजूबों के बारे में बात करते हैं, लेकिन उन्हें विश्व द्वारा मान्यता नहीं दिया गया है. ऐसे और भी अजूबे हैं, जो समय के साथ नष्ट हो गए हैं और आज हम उनके बारे में कुछ नहीं जानते.

दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो (Duniya Ke Saat Ajoobe)

1. माचू पिच्चु (Machu Picchu)

Machu Picchu

पहला अजूबा कौन सा है?, पहले अजूबे मैं मैंने माचू पिच्चु को शामिल किया है, इसका कारण ये है की ये जगह मुझे बेहद पसंद है. और इसके रहस्य भी।

 दुनिया में ऐसे बहुत सारे स्थल हैं जो अपने अन्दर कुछ रहस्य छुपाये हुए हैं. ऐसा ही एक स्थान है पेरू देश में स्थित माचू पिच्चु (Machu Picchu). इस स्थान को आज से लगभग 100 वर्ष पूर्व खोजा गया था. इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी माचू पिचू से प्राप्त कंकालों के बारे में ज्यादा कोई जानकारी नहीं है। इसका निर्माण 1438-1472 में माना गया है।

 वर्ष 1911 में माचू पिच्चु पर्वत श्रृंखला की खोज की गयी थी लेकिन इसका सम्बन्ध तेरहवीं शताब्दी से था. माना जाता है की ये एक शाही विराशत थी, माचू पिच्चु  धार्मिक दृस्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया था। यहां पर हजारों की संख्या में कंकाल प्राप्त हुए हैं। इन कंकालों की खास बात यह है की इन कंकालों में अधिकांश कंकाल महिलाओं के हैं। 

 माचू का अर्थ है पुरानी छोटी, आज तक यह रहस्य कोई सुलझा नहीं पाया की इसका निर्माण किसने करवाया और क्यों करवाया। कुछ लोगों का कंकाल को लेके मानना है की वहां के लोग सूर्य देव की आराधना करते थे और वर्जिन स्त्रियों की बलि चढ़ाया करते थे। इसे लॉस्ट सिटी का नाम भी दिया गया है. 

 वर्ष 1911 में हारीम बिनकम नामक शोधकर्ता ने इस स्थान को सर्वप्रथम खोजा था। सन 2007 में माचू पिच्चु को दुनिया के सात अजूबे (7 Wonders of the World in Hindi) में शामिल किया गया। इस जगह पर पर्यटकों के लिए मरम्मत भी कराया गया। 

इसे भी पढ़े : माचू पिचू के बारे में और जाने

2. पेट्रा Petra

पेट्रा Petra

 पेट्रा प्राचीन काल में निर्मित जॉर्डन (Jordan) में बसा एक ऐतिहासिक नगर है। पेट्रा जो अपने पत्थर से तरासे गए इमारतों के लिए प्रसिद्द है। इसे छठीं शताब्दी में नबादियों ने अपने राजधानी के तौर पर स्थापित किया था। माना जाता है की इसका निर्माण 1200 ईसा पूर्व हुआ था।

 आधुनिक में ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है। जो दुनिया के सात अजूबों में शामिल है. यहाँ कई तरह की इमारते हैं. जो लाल बलुआ पत्थर की बनी हैं, और सभी पर बेहतरीन डिजाइंस की गयी हैं। इसमें 138 फिट ऊँचा मंदिर, नहरें, पानी के तलाब तथा खुला स्थान है. पेट्रा जॉर्डन के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि, ये उनकी कमाई का बहुत ही अच्छा जरिया भी है, यहाँ दुनिया भर के के पर्यटक घूमने आते हैं। 

 पेट्रा एक होर नामक पहाड़ी के ढलान पर बना हुआ है। पेट्रा को यूनस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है. पेट्रा का निर्माण होने के सही समय के बारे में कोई जानकारी ठीक रूप से नहीं है। लेकिन माना जाता है की इसका निर्माण 1200 ईसा पूर्व हुआ था. 363 ईस्वी में एक भूकम्प ने इसके कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया। उस समय पेट्रा रेशम और मसाले के व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।

 पेट्रा सबसे पुराने महानगरों में से एक है जो कई सालों तक लोगों की नजरों से खोया हुआ रहा। लेकिन 1812 में पेट्रा की खोज एक खोजकर्ता जोहान लुडविक बरघट ने की थी। सन 1985 में युनस्कों द्वारा विश्व विरासत को शामिल किया गया, और 2007 में दुनिया के सात अजूबों में शामिल किया गया। 

अभी तक पेट्रा की 15 % भाग की ही खोज की गयी है और 85 % भाग अभी भी खोजै जाना बाकि है। प्रेटा को हर साल लगभग 8 मिलियन लोग देखने आते हैं। यहां देखने जाने के लिए वाहनों को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन ऊंटों, गधों और खच्चरों को लाया जा सकता है। 

इसे भी पढ़े : पेट्रा के बारे में और जाने

3. ताजमहल (Tajmahal)

ताजमहल (Tajmahal)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जब भारत आये तब उन्होंने कहा की “दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं, एक वो जो ताजमहल को देख पाए और एक वो जो बिना देखे मर गएबिल क्लिंटन। इसके जैसा कोई और अजूबा नहीं हो सकता, क्योकिं इसके अंदर शाहजहाँ का दिल दफन है, दिल यानि शाहजहां की मोहब्बत यानि मुमताज, जिससे वे बेपनाह मुहब्बत करते थे।

 मुगल काल में ताजमहल देखने के लिए नदी ही मुख्य रास्ता थी। बादशाह और उनके शाही मन्त्री नाव में बैठ के आते थे। पहले नदी के किनारे चबूतरा हुआ करता था लेकिन समय के साथ वो धीरे -धीरे नष्ट हो गया। एक बात आपने अक्सर सुना होगा की ताजमहल बनाने वाले मजदूरों के हाथ कटवा दिए गए थे। बात बिलकुल अफवाह जैसी लगती है। क्योंकि इस बाद का कोई भी प्रमाण मौजूद नहीं है।

 बहुत सारे विद्वानों का मानना था की शाहजहाँ उन सभी मजदूरों को जिंदगी भर का पैसा देके ये हलफनामा बनवाया की वे कभी भी ऐसा दूसरा ताजमहल नहीं बनाएंगे। ताजमहल से बाहर जो 4 मीनारे हैं वे बिलकुल भी सीधी नहीं खड़ी हैं, बल्कि ये थोड़ी सी बाहर की ओर झुकी हुई हैं। और इन्हे ऐसा ही बनाया गया था। ऐसा इस लिए ताकि भूकम्प आये तो ये चारो मीनार बाहर की ओर गिरे नाकि अन्दर की ओर जिससे ताजमहल को कोई नुकशान ना हो। 

ताजमहल में उपयोग किये हुए संगमरमर को राजस्थान के मखराना से लाया गया था। जेड (Jade) और क्रिस्टल (Crystle) चीन से मँगवाया गया था। लैपिस लाजलि (lapis lajli) अफगानिस्तान से आया था। ऐसे ही कुल 28 से 20 कीमती रत्न अलग अलग देशों से मंगाए गए थे। इन सबको ढोने के लिए 1000 से भी ज्यादा हाथी का इस्तेमाल किया गया था। 

ताजमहल का निर्माण 1631 ईस्वी में बनना शुरू हुआ। और 22 साल बाद 1653 में पूरा हुआ। इसका निर्माण 20,000 कारीगरों और मजदूरों ने किया था। वास्तुकला का इतना बढियाँ नमूना खिन और नहीं है। 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों द्वारा इसे बहुत नुकशान पहुंचाया गया। उन्होंने कई रत्नों को निकलवाकर इंग्लैंड लेके चले गए। 

4. चिचेन इत्जा Chichen Itza

चिचेन इत्जा

चिचेन इत्ज़ा का निर्माण माया समुदाय के लोगों के द्वारा 6 वीं शताब्दी में शुरू किया था जो लगभग 12 वीं शताब्दी तक चला | यह मैक्सिको में युकाटन प्रायद्वीप पर बसा हुआ है। चिचेन का अर्थ है “कुओं का मुँह” और इट्ज़ा का अर्थ इन क्षेत्रों में रहने वाली “जनजाति” से है।

क्योकि युकाटन प्रायद्वीप प्राकृतिक कुओ से भरा पड़ा है इसलिए इसका नाम ऐसा पड़ा | इसकी मुख्य प्रारंभिक इमारतें एक वास्तुशिल्प शैली में हैं, जिसे पुच के रूप में जाना जाता है। पुरातत्व प्रमाण इस बात की पुष्टि करते हैं कि 1221 ई में एक विद्रोह और गृह युद्ध उत्पन्न हुआ जिसमे इसके महान बाजार की लकड़ी की छतें और योद्धाओं के मंदिर को जला दिया गया था।

14 वीं शताब्दी में चिचेन इत्ज़ा का रहस्यमयी अंत हो गया शोधकर्ता इस सामूहिक पलायन का कारण खराब मौसम और सूखे की व्यापक लहर बताते है किसी समय में समृद्ध होने वाला शहर “चिचेन इट्ज़ा युकाटन” के जंगलों में खो गया था। चिचेन इट्ज़ा को अंततः 16 वीं शताब्दी के मध्य में स्पेनिश ने जीत लिया था।

चिचेन इत्ज़ा में चार प्रसिद्ध क्लस्टर है जिसमे ग्रेट नॉर्थ प्लेट फार्म और ओस्सारियो ग्रुप, सेंट्रल ग्रुप और ओल्ड चिचेन हैं, इन चारो में सिर्फ द ग्रेट नॉर्थ प्लेटफार्म को जनता के लिए खोला गया है | द ग्रेट नार्थ प्लेटफार्म चिचेन इत्ज़ा की सबसे अधिक देखी जाने वाली जगह में शामिल है, जिसमें एल कैस्टिलो पिरामिड (कुकुलन मंदिर ), ग्रेट बॉल कोर्ट, वॉरियर्स का मंदिर, सेक्रेड सेनेट (प्राकर्तिक कुए ), जगुआर के मंदिर और बहुत कुछ शामिल हैं।

अपने समय में चिचेन इत्ज़ा पूरे युकाटन प्रायद्वीप में सबसे अधिक आबादी वाला शहर था। आज भी, इसके खंडहर वास्तुशिल्प और प्राचीन रहस्यों से भरी एक महान सभ्यता को दर्शाते हैं।

5. चीन की दीवार (Wall Of China)

चीन की दीवार (Wall Of China)

The Great Wall Of China : चीन की दीवार को मंगोल जनजाति के हमलावरों को चीन से दूर रखने के लिए बनवाया गया था। चीन की दीवार मानव के इतिहास में बनाया गया सबसे बड़ा स्मारक है। इसका अर्थ है की इससे बड़ी बिल्डिंग आज तक किसी ने नहीं बनाई, गूगल के द्वारा स्पेस से देखने पर चीन की दीवार साफ-साफ़ दिखाई देती है। 

कहा जाता है, की इसके निर्माण से बहुतों की जान गयी है। विशाल दीवार पत्थर, मिट्टी से बनी पुरे दुनिया की सबसे बड़ी दीवार है, जिसे चीन के राजाओं द्वारा उत्तरी हमले से बचाने के लिए 5 वीं सदी से लेकर 16 वीं सदी तक बनवाया गया था। सन 1987 में यूनेस्कों ने इसे विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी थी। 

इस दीवार के कुछ हिस्से आपस में जुड़े नहीं हैं, यदि सभी हिस्सों को आपस में जोड़ दिया जाये तो, इस दिवार की कुल लम्बाई 8848 किलोमीटर तक पहुँच जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक इस दीवार को बनाने में 20 से 30 लाख लोगों ने अपना पूरा जीवन इसी पर दे दिया। चीन के दीवार की ऊंचाई हर जगह एक ही नहीं है। सबसे ज्यादा ऊंचाई 35 फिट है, और कुछ जगह इसकी ऊंचाई 8 से 9 फिट ऊँची है। 

चीन की दीवार में शत्रुओं पर निगाह रखने के लिए, निरक्षण मीनारे भी बनाई गयी हैं। दीवार की मोटाई इतनी है की 5 घोड़े एक साथ जा सकते हैं, और 10 सैनिक एक साथ गस्त लगा सकते हैं। भले इस दीवार का निर्माण हमलावरों से बचने के लिए किया गया हो, लेकिन इसका उपयोग आज भी परिवहन और लम्बी यात्रा के लिए किया जा रहा है। 

ऐसा नहीं है की कोई भी हमलावरों ने इसे तोड़ नहीं पाया,सन 1211 में चंगेज खान ने इसे तोड़ कर चीन में घुसा था। ये दीवार लगभग 6400 किलोमीटर लम्बी है। ये दीवार इतनी लम्बी है की, इसे स्पेस से भी देखा जा सकता है, कहा जाता है की जो मजदूर तक जाते थे और कमजोर थे उन्हें इसी में दफन कर दिया जाता था। इसीलिए ऐसे दुनिया का सबसे लम्बा कब्रिस्तान भी कहते है। क्योंकि यहां 3000 लोगों से भी ज्यादा लोगों की लाशे दबी पड़ी है. 

इसे भी देखें : चीन की दीवार के बारे में और अधिक जाने

6. कोलोज़ीयम (Colosseum)

कोलोज़ीयम (Colosseum)

इसे रोमों ने सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया था। यह इटली शहर के रोम में मौजूद है। इसे 72 ईस्वी में, रोमन सम्राट विस्पासियन ने बनाना शुरू किया था। लेकिन वो इसे पूरा बना पाते उससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गयी। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी टाइट्स ने इसे पूरा करवाया। यह 80 ईस्वी में बनकर पूरा हुआ इस विशाल अखाड़े को बनाने में लगभग 1 लाख क्यूबिक पत्थर का इस्तेमाल किया गया था।

अगर इस अखाड़े की बैठे की क्षमता के बारे में बात करें, तो इसमें 50 हजार लोग आसानी से बैठ कर अखाड़े का मजा ले सकते है। इसमें 80 से ज्यादा अंदर जाने के रास्ते हैं, गुप्त द्वार भी है। ये 189 मीटर लम्बा, 156 मीटर चौड़ा, और 50 मीटर ऊँचा है। इसकी ऊंचाई लगभग 12 फ्लोर के बराबर है।

यह इटली में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला स्मारक है। हर साल पुरे विश्व से 50 से 60 लाख लोग इस अखाड़े को देखने आते है। यही वजह है की इसे Seven Wonders of the World की लिस्ट में शामिल किया गया। इसे रोमनों ने मनोरंजन के रूप में बनाया था, जिसमें खुनी लड़ाइयां होती थी। इसमें इंसानो से इंसानो और इंसानो से जानवरों के बीच लड़ाया जाता था। जिसमें उनकी जाने तक करती थी।

इतिहासकारों का माने तो कोलोज़ीयम (Colosseum) में चलने वाला खेल लगभग 100 दिनों तक चलता था।

7. क्राइस्ट रिडीमर (Christ redeemer)

Christ redeemer

क्राइस्ट द रिडीमर (Christ The Redeemer Statue) : क्राइस्ट द रिडीमर की कुल ऊंचाई 38 मीटर है, इस स्टैचू के सबसे ऊपर से आप रियो डि जनेरियो शहर का नजारा देख सकते हैं। क्राइस्ट द रिडीमर को देखने के लिए है हर साल लगभग 19 से 20 लाख लोग यहाँ आते है। 

इतनी बड़ी संख्या में आने के बावजूद भी यहां प्रयटकों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती है, और पर्यटक इसे नुकशान भी नहीं पहुँचाते हैं। इस स्टैचू का निर्माण 1922 में शुरू हुआ था, और 1931 में बन कर तैयार हो गया। ताजमहल की तरह इस स्टैचू की की मरम्मत लाखों डॉलर खर्च कर के किया गया है। यह प्रतिमा ईसाई धर्म के लिए एक प्रतीक भी है।

1850 में विन्सेन्टियन पादरी पेड्रो मारिया बॉस ने, ब्राजील की राजकुमारी रीजेंट और सम्राट पेड्रो ॥ की बेटी को सम्मानित करने के लिए माउंट कोवाडो पर एक ईसाई स्मारक रखने का सुझाव दिया था।

दुनिया के सात अजूबे कौन कौन से हैं और कहां कहां है?

7 Wonders Of The World Names In Hindi –

अजूबे देश
1. माचू पिच्चु पेरू 
2. पेट्रा जॉर्डन
3. ताजमहल भारत
4. चिचेन इत्जा मैक्सिको
5. चीन की दीवार चीन
6. कोलोज़ीयम इटली
7. क्राइस्ट रिडीमर ब्राजील

 

विश्व के प्राचीन सात अजूबों में कौन सा अजूबा सबसे पुराना है?

 पेट्रा, प्राचीन काल में निर्मित जॉर्डन (Jordan) में बसा एक ऐतिहासिक नगर है, माना जाता है की ये विश्व के प्राचीन सात अजूबों में सबसे पुराना अजूबा है, इसका निर्माण 1200 ईसा पूर्व हुआ था। इसे नबादियों ने अपने राजधानी के तौर पर स्थापित किया था।

हमारे भारत में कितने अजूबे हैं?

हमारे भारत देश के भी 7 अजूबे हैं, जिन्हे भारत के लोगों द्वारा भारत के धरोहर के देखा जाता है जिनके नाम ये हैं – स्वर्ण मंदिर, ताजमहल, गोमतेश्वर, नालंदा विश्वविद्यालय, कोणार्क सूर्य मंदिर, खजुराहो और हम्पी, इसमें से केवल ताजमहल को यूनेस्को द्वारा सातवे अजूबे में शामिल किया गया है।

निष्कर्ष

मैंने दुनिया के 7 अजूबे के नाम और स्थान को जिक्र किया हूँ. ये सारे अजूबे विभिन्न देशों में मौजूद हैं, जिन्हे आप देख सकते हैं। अक्सर लोग दुनिया के 10 अजूबे के बारे में बात करते हैं, लेकिन आज भी दुनिया में केवल 7 ही अजूबे हैं, जिन्हे यूनेस्को द्वारा मान्यता दिया गया है। तो अब आपसे कोई पूछे, विश्व में कुल कितने अजूबे हैं? तो आप आसानी से बता सकते हैं की विश्व में केवल 7 ही अजूबे (Duniya Ke Saat Ajoobe) मौजूद हैं। 

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